धर्म-परिवर्तन नहीं, हृदय-परिवर्तन क्यों आवश्यक है
कैसे घृणा और अंध-निष्ठा से भटका समाज सत्य, अहिंसा और करुणा के अभ्यास से पुनः संतुलित हो सकता है।
8 मिनट पढ़ें | 2026-06-03
हृदय-परिवर्तन का आमंत्रण
यह उन लोगों तक पहुंचने का विनम्र प्रयास है जिन्हें धर्म के नाम पर घृणा, वैमनस्य, हिंसा और अधर्म की खाइयों में धकेला जा रहा है; जिन्होंने किसी नेता को भगवान, किसी दल को धर्म और किसी विचारधारा को अंतिम सत्य मान लिया है।
विचार-श्रृंखला
यहां धर्म का अर्थ अंधभक्ति नहीं, बल्कि सत्य, अहिंसा, प्रेम, करुणा और आत्मचिंतन का जीवन-मूल्य है।
कैसे घृणा और अंध-निष्ठा से भटका समाज सत्य, अहिंसा और करुणा के अभ्यास से पुनः संतुलित हो सकता है।
8 मिनट पढ़ें | 2026-06-03
व्यक्तिपूजा और दल-भक्ति किस तरह मनुष्य को नैतिकता से दूर करती है, और उससे लौटने का व्यावहारिक मार्ग क्या है।
11 मिनट पढ़ें | 2026-06-19
धर्म के नाम पर बनी चुप्पियों को तोड़ते हुए, तर्क और आत्मचिंतन को आध्यात्मिक तथा सामाजिक कर्तव्य के रूप में समझना।
9 मिनट पढ़ें | 2026-07-07
मनुष्य की पहचान विचारधारा से नहीं, उसके आचरण से बने; इसी परिवर्तन से समाज का वास्तविक सुधार शुरू होता है।
10 मिनट पढ़ें | 2026-07-18
व्यंग्य
यहां व्यंग्य उपहास के लिए नहीं, चेतना के लिए है; ताकि मनुष्य प्रश्न कर सके और सत्य की ओर लौट सके।
विवेक व्यंग्य
धर्म के नाम पर फैलती अफवाहों और बिना सोचे-समझे निष्ठा पर एक करुणामूलक व्यंग्यात्मक दृष्टांत।
मीडिया विवेचन
कैसे प्रश्न पूछने की जगह शोर, और करुणा की जगह वैमनस्य ले लेता है, इस पर संवादात्मक व्यंग्य।
दैनिक चिंतन
मनुष्य की पहचान दल से नहीं, उसकी नैतिकता से हो; यही इस मंच का चिंतन है।
"हिंदू-घर-वापसी कोई धर्म-परिवर्तन नहीं, हृदय-परिवर्तन का आमंत्रण है।"
धर्म की ओर लौटना किसी नई पहचान लेना नहीं, बल्कि अपने भीतर की नैतिक ज्योति को जगाना है।