उद्धरण
सत्य, करुणा और विवेक का आंतरिक प्रकाश
चयनित पंक्तियां जो मनुष्य को घृणा से बाहर और आत्मचिंतन की ओर ले जाएं।
"हिंदू-घर-वापसी कोई धर्म-परिवर्तन नहीं, हृदय-परिवर्तन का आमंत्रण है।"
धर्म की ओर लौटना किसी नई पहचान लेना नहीं, बल्कि अपने भीतर की नैतिक ज्योति को जगाना है।
"जहां प्रश्न दबाए जाते हैं, वहां सत्य भी दूर चला जाता है।"
प्रश्न करना विरोध नहीं, ज्ञान और जिम्मेदारी की शुरुआत है।
"नेता-भक्ति से पहले मनुष्य-धर्म को पहचानो।"
किसी व्यक्ति या दल से बड़ी चीज मनुष्य की करुणा, सत्यनिष्ठा और अहिंसक दृष्टि है।
"जो अंधेरे गड्ढे से बाहर निकलने का हाथ थाम ले, वही धर्म के प्रकाश की ओर बढ़ता है।"
यह मंच उसी हाथ की तरह है, जो घृणा से घायल मन को करुणा की दिशा दिखाता है।
